दो विवाह के योग – वैदिक ज्योतिष मेंज्योतिष में सप्तम भाव विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी का भाव है। जब सप्तम भाव, उसके स्वामी, या विवाह के कारक ग्रह पीड़ित हों तो “द्विभार्या योग” या दो विवाह की संभावना बनती है। आपने जो बिंदु लिखे हैं, उन्हें एक-एक कर विस्तार से समझते हैं: महत्वपूर्ण निष्कर्ष और […]
दो विवाह के योग
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दो विवाह के योग
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यदि हो कोई लंबे समय से बीमार तो अपनाएं ये 14 उपाय –
यदि हो कोई लंबे समय से बीमार तो अपनाएं ये 14 उपाय –
यदि आप या आपके घर का कोई सदस्य लंबे समय से बीमारी हो या बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही रहो तो यहां लाल किताब के कुछ सामान्य उपाय बताए जा रहे हैं परंतु इन उपायों को लाल किताब के किसी जानकार से पूछकर ही करें।
- प्रति सप्ताह गाय, कौए और कुत्तों को मीठी रोटियां खिलाएं। रोगी के उपर से एक रोटी वारकर कुत्ते को खिलाएं। प्रतिदिन कुत्ते को रोटी खिलाने से आकस्मिक संकट दूर रहते हैं।
- ब्लड प्रेशर या अनावश्यक बैचेनी को कंट्रोल करने के लिए प्रतिदिन रात में सोते समय एक तांबे के लौटे में पानी भरकर रखें और सुबह उसे किसी बबूल के वृक्ष या पौधे में डाल दें या बाहर ढोल दें। ऐसा 43 दिनों तक करें।
- पका हुआ कद्दू या सीताफल गुरुवार को मंदिर में दान करें।
- कान की बीमारी के लिए काले-सफेद तिल सफेद और काले कपड़े में बांधकर जंगल या किसी सुनसान जगह पर गाड़कर आ जाएं।
- शुगर, जोड़ों का दर्द, मूत्र रोग, रीढ़ की हड्डी में दर्द के लिए काले कुत्ते की सेवा करें।
- काला और सफेद अर्थात दोरंगी कंबल को 21 बार खुद पर से वारकर उसे किसी मंदिर में या गरीब को दान कर दें। इससे संकट टल जाता है।
- पानीदार एक नारियल लें और उसे अपने ऊपर से 21 बार वारें। वारने के बाद उसे किसी देवस्थान पर या घर के बाहर जाकर अग्नि में जला दें। 5 शनिवार ऐसा करने से जीवन में अचानक आए कष्ट से छुटकारा मिलेगा। यदि किसी सदस्य की सेहत खराब है उसके लिए यह उपाय उत्तम है।
- शनिवार को एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल और सिक्का (रुपया-पैसा) डालकर उसमें अपनी परछाई देखें और तेल मांगने वाले को दे दें या किसी शनि मंदिर में शनिवार के दिन कटोरी सहित तेल रखकर आ जाएं।
- शुक्रवार को लकड़ी के पाट पर बैठकर अच्छे से दही स्नान करने से चर्म रोग ठीक होते हैं।
- प्रतिदिन सुबह और शाम घर में संध्यावंदन के समय कर्पूर जरूर जलाएं।
- प्रतिदिन संध्यावंदन के साथ हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए। हनुमान चालीसा पढ़ने से जहां पितृदोष, मंगलदोष, राहु-केतू दोष आदि दूर होते हैं वहीं भूत-प्रेतादि का बुरा असर या साया भी हट जाता है। हनुमान बहुक पढ़ने से भी शरीर का दर्द मिट जाता है।
- जब भी श्मशान या कब्रिस्तान से गुजरना हो तो तांबे के सिक्के उक्त स्थान पर डालने से दैवीय सहायता प्राप्त होगी।
- यदि आंखों में पीड़ा हो तो शनिवार को चार सूखे नारियल नदी में प्रवाहित करें।
- सिरहाने कुछ रुपए-पैसे रख कर प्रात: सफाईकर्मी को दे दें।
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कुछ सरल उपाय जिन्हें हर किसी को करना चाहिए –
कुछ सरल उपाय जिन्हें हर किसी को करना चाहिए –
सफाईकर्मी को कुछ सिक्के दान करें।
अपने घर में मिट्टी के बर्तन में शहद रखें।
बहते जल में रेवड़ियां व बताशे प्रभावित दें।
चांदी या तांबे के गिलास में ही जल ग्रहण करें।
बुधवार के दिन कन्याओं को हरे वस्त्र या हरी चूड़ियों दान करें।
पीपल, बरगद, नीम तथा केले की जड़ में नित्य जल अर्पित करें।
प्रतिदिन कुत्ते को रोटी खिलाएं, यदि कुत्ता काला हो तो उत्तम रहेगा।
भोजन के उपरांत देशी गुड़ अवश्य खाएं तथा परिवार के लोगों को भी दें।
चींटी, पक्षी, गाय, कुत्ता, कौवा, आदि प्राणियों के लिए अन्न-जल की व्यवस्था अवश्य करें।
हमेश चांदी का छोटा सा चौकोर टुकड़ा अपने पास रखें. इसे घर की तिजोरी में भी रख सकते हैं।
तांबे के लोटे में जल भरकर उसे सिरहाने रखकर सोएं तथा अगले दिन सुबह जल को बाहर फेंक दें।
अगर इन उपायों को करने के बाद भी राहत महसूस ना हो तो अपनी कुंडली किसी विद्वान को चेक करवा ले।
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बुधवार विशेष
👉बुधवार विशेष –
बुद्ध नवे घर में सबसे अच्छा और सबसे बुरा परिणाम इसी घर में देता है
इसलिए इस घर में बुध का उपाय करने से पहले बुद्ध का भेद निकालना बहुत जरूरी हो जाता है अगर बुध बुरा परिणाम दे रहा हो
सावधानियाँ
चाँदी धारण करें
चाँदी पहनना बुध के अशुभ प्रभाव को कम करता है।
लाल रंग की लोहे की गोली साथ रखें
लाल रंग से रंगी लोहे की गोली जेब में रखें।
साबुत मूंग का दान
बुध दोष कम करने के लिए साबुत मूंग दान करें।
नाक छेदन
बुध के नकारात्मक प्रभाव को कम करने हेतु नाक छिदवाएँ।
फकीरों से ताबीज न लें
किसी साधु या फकीर से ताबीज या लॉकेट स्वीकार न करें।
पीले चावल का जल प्रवाह
लगातार 43 दिनों तक पीले चावल जल में प्रवाहित करें।
नए कपड़े धोकर पहनें
कोई भी नया वस्त्र पहले धोकर ही धारण करें।
देवी दुर्गा का पाठ और बुधवार व्रत
नियमित रूप से दुर्गा पाठ करें और बुधवार का व्रत रखें।
लाल गाय को रोटी खिलाएँ
लाल गाय को रोटी खिलाना शुभ माना जाता है।
हरे कपड़ों से परहेज
हरे वस्त्र न पहनें और घर में भी हरे कपड़ों का अत्यधिक प्रयोग न करें।
मशरूम का दान
मिट्टी के बर्तन में मशरूम भरकर धार्मिक स्थान पर दान करें।
🟢 बुध ग्रह – उपाय
बंद कुएँ वाले मकान से बचें
ऐसे घर में न रहें जहाँ कुआँ या जल स्रोत बंद हो, या बार-बार सीढ़ियाँ पुनः बनी हों।
पीले चावल 43 दिन प्रवाहित करें
लगातार 43 दिनों तक जल में पीले चावल प्रवाहित करें।
नाक छेदन (100 घंटे)
नाक छिदवाकर कम से कम 100 घंटे तक धारण करें।
लाल रंग की लोहे की गोली रखें
इसे हमेशा अपने पास रखें।
यंत्र, ताबीज और हरे कपड़े न रखें
घर में अनावश्यक यंत्र, ताबीज, हाथी की मूर्ति तथा हरे कपड़े न रखें।
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वैशाख मास की अंतिम तीन तिथियों का महत्व===========================
वैशाख मास की अंतिम तीन तिथियों का महत्व
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श्रुतदेव जी कहते हैं – राजेन्द्र ! वैशाख के शुक्ल पक्ष में जो अन्तिम तीन तिथियाँ, त्रयोादशी से पूर्णिमा तक, हैं वे बड़ी पवित्र और शुभ कारक हैं। उनका नाम “पुष्करिणी” हैं, वे सब पापों का क्षय करने वाली हैं। जो संपूर्ण वैशाख मास में स्नान करने में असमर्थ हैं, वह यदि इन तीन तिथियों में भी स्नान करें तो वैशाख मास का पूरा फल पा लेता है। पूर्वकाल में वैशाख मास की एकादशी तिथि को शुभ अमृत प्रकट हुआ। द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की। त्रयोदशी तिथि को उन श्रीहरि ने देवताओं को सुधा-पान कराया। चतुर्दशी तिथि को देव विरोधी दैत्यों का संहार किया और पूर्णिमा के दिन समस्त देवताओं को उनका साम्राज्य प्राप्त हो गया इसलिए देवताओं ने संतुष्ट होकर इन तीन तिथियों को वर दिया।“वैशाख मास की ये तीन शुभ तिथियाँ मनुष्यों के पापों का नाश करने वाली तथा उन्हें पुत्र-पौत्रादि फल देने वाली हों। जो मनुष्य इस संपूर्ण मास में स्नान न कर सका तो वह इन तिथियों में स्नान कर लेने पर पूर्ण फल को ही पाता है। वैशाख मास में लौकिक कामनाओं का नियमन करने पर मनुष्य निश्चय ही भगवान विष्णु का सायुज्य प्राप्त कर लेता है। महीने भर नियम निभाने में असमर्थ मानव यदि उक्त तीन दिन भी कामनाओं का संयम कर सके तो उतने से ही पूर्ण फल को पाकर भगवान विष्णु के धाम में आनन्द का अनुभव करता है।”
इस प्रकार वर देकर देवता अपने धाम को चले गए। अत: पुष्करिणी नाम से प्रसिद्ध अन्तिम तीन तिथियाँ पुण्यदायिनी, समस्त पाप राशि का नाश करने वाली तथा पुत्र-पौत्र को बढ़ाने वाली हैं। जो वैशाख मास में अन्तिम तीन दिन गीता का पाठ करता है, उसे प्रतिदिन अश्वमेघ-यज्ञ का फल मिलता है। जो उक्त तीनों दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करता है उसके पुण्य फल का वर्णन करने में इस भूलोक तथा स्वर्गलोक में कौन समर्थ है? पूर्णिमा को सहस्त्रनामों के द्वारा भगवान मधुसूदन को दूध से नहलाकर मनुष्य पापहीन वैकुण्ठ धाम में जाता है।
वैशाख मास में प्रतिदिन भागवत के आधे या चौथाई श्लोक का पाठ करने वाला मनुष्य ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है। जो वैशाख के अंतिम तीन दिनों में भागवत शास्त्र का श्रवण करता है, वह जल से कमल के पत्ते की भाँति कभी पापों से लिप्त नहीं होता। उक्त तीनों दिनों के सेवन से कितने ही मनुष्यों ने देवत्व प्राप्त कर लिया, कितने ही सिद्ध हो गए और कितने ही मनुष्यों ने ब्रह्मत्व प्राप्त कर लिया। ब्रह्मज्ञान से मुक्ति होती है अथवा प्रयाग में मृत्यु होने से या वैशाख मास में नियमपूर्वक प्रात:काल जल में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए वैशाख के अन्तिम तीन दिनों में स्नान, दान और भगवत्पूजन आदि अवश्य करना चाहिए। वैशाख मास के उत्तम माहात्म्य का पूरा-पूरा वर्णन रोग-शोक से रहित जगदीश्वर भगवान नारायण के सिवा दूसरा कौन कर सकता है। तुम भी वैशाख मास में दान आदि उत्तम कर्म का अनुष्ठान करो। इससे निश्चय ही तुम्हें भोग और मोक्ष की प्राप्ति होगी।इस प्रकार मिथिलापति जनक को उपदेश देकर श्रुतदेव जी ने उनकी अनुमति ले वहाँ से जाने का विचार किया। वस्त्र, आभूषण, गौ, भूमि, तिल और सुवर्न आदि से उनकी पूजा और वन्दना करके राजा ने उनकी परिक्रमा की। तत्पश्चात उनसे विदा हो महातेजस्वी एवं परम यशस्वी श्रुतदेव जी संतुष्ट हो प्रसन्नतापूर्वक वहाँ से अपने स्थान को गए। राजा ने वैशाख धर्म का पालन करके मोक्ष प्राप्त किया।
नारदजी कहते हैं – अम्बरीष ! यह उत्तम उपाख्यान मैंने तुम्हें सुनाया है, जो कि सब पापों का नाशक तथा सम्पूर्ण संपत्तियों को देने वाला है। इससे मनुष्य भुक्ति, मुक्ति, ज्ञान एवं मोक्ष पाता है। नारद जी का यह वचन सुनकर महायशस्वी राजा अम्बरीष मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने बाह्य जगत के व्यापारों से निवृत होकर मुनि को साष्टांग प्रणाम किया और अपने संपूर्ण वैभवों से उनकी पूजा की। तत्पश्चात उनसे विदा लेकर देवर्षि नारद जी दूसरे लोक में चले गए क्योंकि दक्ष प्रजापति के शाप से वे एक स्थान पर नहीं ठहर सकते।
राजर्षि अम्बरीष भी नारदजी के बताए हुए सब धर्मों का अनुष्ठान करके निर्गुण परब्रह्म परमात्मा में विलीन हो गए। जो इस पाप नाशक एवं पुण्यवर्द्धक उपाख्यान को सुनता या पढ़ता है वह परम गति को प्राप्त होता है। जिनके घर में यह लिखी हुई पुस्तक रहती है, उनके हाथ में मुक्ति आ जाती है फिर जो सदा इसके श्रवण में मन लगाते हैं उनके लिए तो कहना ही क्या है!
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12वें भाव के स्वामी का 12वें भाव में होना
🔺 12वें भाव के स्वामी का 12वें भाव में होना
आध्यात्मिक साधकों के लिए सबसे अच्छे योगों में से एक है। यह समर्पण, ध्यान और वैराग्य के माध्यम से मोक्ष की ओर एक स्वाभाविक मार्ग का संकेत देता है। आपको एकांत में या निर्जन स्थानों पर रहने से गहरी आंतरिक शांति मिल सकती है।
🔺 चूंकि 12वां भाव विदेश का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसके स्वामी का यहाँ होना विदेश में बसने या विदेशी भूमि में सफलता का एक मजबूत संकेत है। आप विदेश प्रवास कर सकते हैं या दूर देशों में काम करते हुए मनचाहे पेशेवर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
🔺 आपको बार-बार खर्चों का सामना करना पड़ सकता है, चाहे वे आपकी इच्छा से हों या नहीं। हालांकि, चूंकि इस भाव का स्वामी मजबूत है, इसलिए आप आकस्मिक नुकसान के बजाय शुभ या धर्मार्थ कार्यों पर खर्च कर सकते हैं।
🔺 यह भाव नींद और “शैया सुख” को नियंत्रित करता है। 12वें भाव के स्वामी का यहाँ अच्छी स्थिति में होना अच्छी नींद और शारीरिक सुख सुनिश्चित करता है, हालांकि विशिष्ट ग्रहों का प्रभाव (जैसे सूर्य) कभी-कभी नींद में खलल या विवाद का कारण बन सकता है। जबकि 12वां भाव गुप्त शत्रुओं का प्रतिनिधित्व करता है, इसका स्वामी अपने ही घर में होने के कारण सुरक्षा प्रदान करता है और गुप्त चुनौतियों पर विजय पाने की क्षमता देता है।
🔴विभिन्न ग्रहों का प्रभाव
*सूर्य (Sun): पिता के साथ दूरी या पिता का अपनी ही दुनिया में व्यस्त रहना; सोने (Gold) या सरकारी कार्यों पर खर्च।
चंद्रमा (Moon): तीव्र अंतर्ज्ञान (Intuition) और सहानुभूति; स्पष्ट सपने आने की संभावना और भावनात्मक संवेदनशीलता।
मंगल (Mars): प्रत्यक्ष टकराव में कठिनाई हो सकती है, लेकिन गुप्त शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के माध्यम से लाभ मिलता है।
गुरु (Jupiter): अक्सर गहरा आध्यात्मिक ज्ञान, दार्शनिक शांति और धर्मार्थ गतिविधियों में सफलता दिलाता है।
शुक्र (Venus): शारीरिक सुख-सुविधाओं के लिए उत्कृष्ट और अपरंपरागत या आध्यात्मिक परिवेश में प्रेम संबंध बनाने में सहायक।
शनि (Saturn): आध्यात्मिक साधनाओं में सख्त अनुशासन की आवश्यकता होती है और अक्सर यह भारी पिछले कर्मों के निपटारे का संकेत देता है।
विशेष नोट:
जब 12वें भाव का स्वामी क्रियात्मक अशुभ ग्रहों (functional malefic) या राहु, केतु, मांदी, गुलिका जैसे पाप ग्रहों के साथ युति करता है, या उन पर किसी प्रबल अशुभ ग्रह की दृष्टि होती है, अथवा यदि 12वें भाव का स्वामी षडबल में कमजोर हो, तो यह सभी सकारात्मक परिणामों को नष्ट कर देता है और प्रतिकूल प्रभाव पैदा करता है।यदि 12वें भाव पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो और वह पीड़ित हो, तो जातक को जीवन के किसी भी पहलू में सफलता मिलना कठिन हो जाता है, क्योंकि 12वां भाव पिछले जन्म का प्रतिनिधित्व करता है।
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मेष संक्रांति
मेष संक्रांति (14 अप्रैल 2026) पर सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जो नए साल का प्रतीक है। इस दिन सूर्य पूजा, तांबे/गुड़/लाल मसूर दाल का दान और पवित्र स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है। इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं, करियर की बाधाएं दूर होती हैं और कुंडली में मंगल, राहु-शनि के अशुभ प्रभाव कम होकर सुख-समृद्धि आती है।
मेष संक्रांति पर मुख्य ज्योतिषीय उपाय (14 अप्रैल 2026):
- सूर्य देव की पूजा: सुबह जल्दी स्नान करके सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल, लाल फूल, कुमकुम और गुड़ डालकर “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें।
- दान-पुण्य (विशेष उपाय): मेष संक्रांति पर तांबा, गुड़, चावल, गेहूँ, या लाल मसूर की दाल का दान करना उत्तम है, जो ग्रहों का बुरा असर कम करता है।
- मंगल दोष के लिए: मसूर की दाल, लाल कपड़े, या चंदन का दान करें। इस दिन हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
- करियर और सफलता: आदित्य हृदय स्तोत्र का 3 बार पाठ करें।
- विशेष उपाय (राहु-शनि): अगर करियर में परेशानियां हैं, तो कत्था (pan item) या खैर की लकड़ी को प्रवाहित करें, इससे राहु-शनि शांत होते हैं।
- सत्तू का दान: मेष संक्रांति को ‘सत्तू संक्रांति’ भी कहते हैं, इसलिए सत्तू का सेवन और दान करने से मंगल
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जानिए किस ग्रह की खराबी से होता है पेट का अल्सर ?
जानिए किस ग्रह की खराबी से होता है पेट का अल्सर ?
प्रश्न : कैसे ठीक करें पेट में होने वाले रोग ?
उत्तर : ज्योतिष के अनुसार जब जन्म कुंडली का राहु चौथे घर में बैठ जाता है या फिर चौथे घर से संबंध रखता है तो हमे हमारे शरीर में पेट से संबन्धित दिक्कतों का सामना करना पड़ता है l जब कुंडली का राहु खराब हो जाता है तो हमारे पेट में हमेशा दर्द रहता है, अल्सर की बीमारी भी हो जाती है और जीतने भी पेट से संबन्धित रोग है वो सब इस ग्रह की खरबी की वजह से होता है l हर किसी इंसान को किसी न किसी ग्रह से जुड़ी बीमारी अवश्य होती है l अब इस बात का पता हम अपनी जन्म कुंडली में खराब ग्रह की स्थिति का आंकलन कर उस बीमारी का पता लगा सकते है lलाल किताब उपाय : 27 दिन लगातार 6 नीले फूल या 6 नीले कंचे लेकर सांझ के समय सूर्यास्त के बाद इसे वीरान जमीन में दबाएँ l
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खराब ग्रहों के उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खराब ग्रहों (ग्रह दोष) के कारण जीवन में शारीरिक, आर्थिक और मानसिक परेशानियां आ सकती हैं। इसके लिए दान-पुण्य, मंत्र जाप, और सही आचरण (जैसे- सम्मान, ईमानदारी) सबसे कारगर उपाय हैं। उपाय के रूप में, जरूरतमंदों की सेवा करें, सूर्य को जल चढ़ाएं, और शनिवार को शनिदेव की पूजा करें।
खराब ग्रहों के प्रमुख लक्षण और उपाय (Planet-wise Remedies):
- सूर्य (Sun): यदि सूर्य खराब हो, तो पिता से मतभेद, स्वास्थ्य में गिरावट, और सरकारी कामों में बाधा आती है।
- उपाय: सुबह जल्दी उठकर सूर्य को जल (अर्घ्य) दें, जरूरतमंदों की सेवा करें।
- चंद्रमा (Moon): मानसिक तनाव, भावनात्मक अस्थिरता, और नींद न आने की समस्या।
- उपाय: माता का सम्मान करें, चांदी में मोती पहनें, शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
- मंगल (Mars): अत्यधिक गुस्सा, भाई-बहनों से विवाद, दुर्घटना का डर।
- उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें, जरूरतमंदों को मीठा भोजन कराएं।
- बुध (Mercury): व्यापार में नुकसान, त्वचा संबंधी रोग, बोलने में समस्या।
- उपाय: गणेश जी की पूजा करें, गाय को हरा चारा खिलाएं।
- गुरु/बृहस्पति (Jupiter): विद्या में रुकावट, पेट की समस्याएं, भाग्य का साथ न मिलना।
- उपाय: गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करें, बेसन के लड्डू का दान करें।
- शुक्र (Venus): वैवाहिक जीवन में कलह, आर्थिक तंगी, शारीरिक सुख में कमी।
- उपाय: लक्ष्मी जी की पूजा करें, इत्र का प्रयोग करें, सफेद वस्तुएं दान करें।
- शनि (Saturn): कार्यों में देरी, लगातार बीमारी, असफलता।
- उपाय: शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं, सरसों के तेल का दान करें।
- राहु/केतु (Rahu/Ketu): भ्रम, अचानक दुर्घटना, मानसिक उलझनें।
- उपाय: काला-सफेद कंबल दान करें, काले कुत्ते को रोटी खिलाएं।
सामान्य उपाय और आचरण (General Remedies):
- अपने घर के बड़ों और माता-पिता का सम्मान करें।
- गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन या कपड़े दान करें।
- सुबह जल्दी स्नान करें और नियमित रूप से पूजा-पाठ करें।
- घर में सकारात्मकता बनाए रखें और नशा न करें।
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- सूर्य (Sun): यदि सूर्य खराब हो, तो पिता से मतभेद, स्वास्थ्य में गिरावट, और सरकारी कामों में बाधा आती है।
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शनि और चंद्रमा की युति या दृष्टि से ‘विष योग’
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि और चंद्रमा की युति या दृष्टि से ‘विष योग‘ बनता है, जो मानसिक तनाव, डिप्रेशन, अकेलापन और अत्यधिक नकारात्मक सोच का कारण बनता है। ऐसा व्यक्ति अंदर ही अंदर असुरक्षित महसूस करता है, आत्मविश्वास में कमी (आत्म-संदेह), निर्णय लेने में कठिनाई और अवसाद का शिकार हो सकता है।
विष योग के मुख्य प्रभाव और लक्षण:
- अत्यधिक ओवरथिंकिंग (Overthinking): मन शांत नहीं रहता, नकारात्मक विचारों का चक्र चलता रहता है।
- डर और चिंता: अज्ञात भय और असुरक्षा की भावना बनी रहती है।
- मानसिक थकान व अकेलापन: मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करना और खुद को समाज से अलग-थलग कर लेना।
- काम में देरी (Procrastination): आत्मविश्वास की कमी के कारण कार्यों को टालने की प्रवृत्ति।
- परिणामों में देरी: मेहनत के बावजूद सही समय पर परिणाम न मिलना, जिससे निराशा बढ़ती है।
प्रभाव कम करने के उपाय:
- शिव उपासना: भगवान शिव की पूजा सबसे प्रभावी है। सोमवार को शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें, साथ ही ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।
- हनुमान चालीसा का पाठ: प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ने से शनि के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और मानसिक दृढ़ता आती है।
- ध्यान और योग: ध्यान (Meditation) करने से मानसिक स्थिरता और फोकस बढ़ता है।
- भावनाओं को व्यक्त करें: अपनी बातों को भरोसेमंद लोगों से साझा करें, अकेला न रहें।
- समय पर काम: काम को टालने के बजाय, उसे समय पर पूरा करने का प्रयास करें।
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